Slotter Machine




                                                  PARTS OF SLOTTER MACHINE

USES OF SLOTTER MACHINE


Introduction :-

वाणिज्यिक रूप से बिक्री के लिये उपलब्ध सबसे पहले मशीनी औजार सन् 1800 के आसपास इंग्लैण्ड के मैथ्यू-मुर्रे ने बनाये थे।

Working and Principle:-

इसका रैम वर्टिकल अक्षिस के अबाउट रेसिप्रोकेट करता है। इसके लिये क्रैंक एक कनक्टिँग रोड मेकनिस्म का प्रयोग किया जाता है।
इसमें एक रोटरी टेबल होता है,जो लम्बबत और क्रासवाईस मूव करता है।
इसका प्रयोग अन्धरुनी तथा बाहरी सतह बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है।

Operations:-

1. मशिनिंग स्लोट्स,चाबीघाट अलग-अलग आकार के अन्धरुनी तथा बाहरी ग्रूव, डाइस, पंचस, ब्लाइंड सुराख की आन्तरिक मशिनिंग इत्यादि

2. समतल सतहों की मशिनिंग , बेलनाकार सतहों की मशिनिंग, आन्तरिक तथा बाहरी गियर

Specification:-

1. स्ट्रोक की लंबाई से
2. टेबल के व्यास से
3. टेबल के क्रासवाइस और लम्बबत मूवमेंट से
4. फ़ीड और स्पीड संख्या से
5. फ्लोर स्पेस के अनुसार
6. कुल भार के अनुसार

Types of Slotter :-

1. पंचर स्लॉटर :- यह एक हैवी रिजिट मशीन होता है। जिसका प्रयोग भारी मात्रा में फोर्जिंग तथा कास्टिंग के जॉब से मेटल को काटने के लिए किया जाता है। इसका लेंथ ऑफ स्ट्रोक 1.8 मी से 2 मी तक होता है।

2. प्रीसिजन स्लॉटर:- यह एक हल्की मशीन है। जो उच्च गति पर चलती है।
इसका प्रयोग शुद्ध फिनिश तथा लाइट कट के लिये किया जाता है।

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